निर्णय कैसे ले ?

मान लीजिये की आपने एक रेडीमेड कपड़ो की दूकान खोली है ! आपको दूकान  खोले हुए एक साल हो गया है !  दूकान आपका बहुत अच्छा चल रहा है आपको प्रॉफिट भी ५० % से ऊपर हो ! अब आप अपने दूकान का विस्तार कर रहे हो मतलब एक छोटी सी दूकान को आप एक बड़ी दूकान में बदल रहे हो ! आप एक एम् बी ओ रिटेलिंग में कदम रख रहे हो ! आप देखते हैं की आपका लागत और ओवरहेड बढ़ गया है और आपका ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम हो गया है ऐसे समय में आपको निर्णय लेने की जरुरत है लेकिन  निर्णय लेने से पहले आपको अपने विकल्पों पर विचार करने की जरुरत है

हम अपने जीवन में कोई न कोई निर्णय  हर दिन लेते हैं आप देखेंगे की कोई निर्णय बहुत आसान होती है तो कोई बहुत मुश्किल ! आपके कुछ निर्णय इतने नियमित होते हैं की आप उन्हें बिना विचार किये ही बनाते हैं लेकिन मुश्किल या चुनौतीपूर्ण निर्णय अधिक विचार मांगते हैं।

ये ऐसे निर्णय हैं जिनमें शामिल हैं!

  • अनिश्चितता :- अनिश्चितता से अर्थ ऐसी समस्या से है जिसके तथ्य का हमें पहले से ज्ञात नहीं होता है ! मान लीजिये आपकी कपडे की दूकान शहर के किसी ऐसे Prime location में है जहाँ आपकी बिक्री बहुत ज्यादा हो रही है और मुनाफा भी  ज्यादा हो रहा है अचानक से आपको नगरपालिका विभाग से एक नोटिस  आता है की आपकी ये दूकान सरकारी जमींन के अंदर है जिस कारण से आपको वह से दूकान हटाने को कहा जा रहा है मतलब ये एक ऐसी समस्या है जिसका आपको पहले से पता नहीं था ! ऐसे समय में निर्णय लेने में काफी विचार करना  होता है !
  • जटिलता :- जटिल समस्या होने  के भी कई पारस्परिक कारण हो सकते है और उनका निर्णय लेना भी उतना ही कठिन है !
  • विकल्प :- किसी भी समस्या के समाधान के कई सारे विकल्प हो सकते हैं लेकिन विकल्प को अनिश्चितता और परिणामो के आधार पर चयन करे!
  • पारस्परिक मुद्दे :- लोग आपकी समस्या के मुद्दे पर अलग अलग तरह की प्रक्रिया दे सकते हैं इसके लिए आपको तैयार रहना होगा !

ऐसी जटिल मुद्दो वाली समस्या का जब आप निर्णय लेते हैं तब आपके अंदर निर्णय लेने की कला का पता चलता है और अपने निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार करके एक प्रभावी और मजबूत परिणाम पा सकते हो

यह आर्टिकल आपके जीवन की किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति चाहे वो आपके जीवन की पारिवारिक परिस्थिति हो या व्यवसायिक परिस्थिति के समस्या सुलझाने और निर्णय लेने की रणनीतियों के संयोजन के लिए ऐसी एक प्रक्रिया को रेखांकित करता है। जिसमे आप सही निर्णय लेने में सक्षम हो सकते हैं !यह भी हो सकता है की किसी भी समस्या का प्रारंभिक निर्णय या विकल्प सही नहीं  हो!  कहते हैं न की गलतियों से ही आदमी सीखता है ऐसा होने से रोकने के लिए, आपको अपनी समझ को स्पष्ट करने के लिए समस्या सुलझाने और निर्णय लेने की रणनीतियों को एक साथ लाने की आवश्यकता होगी !

आप सही निर्णय लेने के लिए सात बातो को ध्यान  में रखे !

  • एक रचनात्मक वातावरण बनाये :-  जब किसी कंपनी की बोर्ड ऑफ़ मीटिंग में अन्य  सदस्यों को भी किसी जटिल समस्या का निर्णय लेने में शामिल किया जाता है तो एक (Creative environment ) रचनात्मक वातावरण बन जाता है ! कुछ परिस्थितिया ऐसी होती है की आप अकेले निर्णय नहीं ले सकते अगर आपने कुछ निर्णय लिया भी है तो समूह की राय विचार लेना आवश्यक हो जाता है ! समूह में समस्या पर चर्चा करे और सभी के विचारो को ध्यान  से सुने और फिर एक निर्णय बनाये !
  • स्थिति को विस्तार से जांचे:- निर्णय लेने से पहले यह विचार करे की आप अपनी स्थिति को पूरी तरह से समझ चुके हैं ! किसी भी निर्णय को लेने से पहले निर्णय के उदेश्यो पर विचार करे हो सकता  है आपका निर्णय आपके लिए तो सही हो पर कही और इसका कुछ और परिणाम निकल रहा हो उदाहरण  के लिए आप किसी सरकारी विभाग में कुछ परिवर्तन के लिए कोई निर्णय लेते हैं जिसका परिणाम आपके विभाग में तो सही होता है मगर किसी  और विभाग में इसका परिणाम कुछ और प्रभाव डाल रहा हो ! किसी भी निर्णय को लेने के लिए ” क्या हो रहा है ” इसकी बेहतर समझ हासिल करे ! यह भी सुनिश्चित करे की किसी भी समस्या को समझने  में आप किसी महत्वपूर्ण जानकारी को तो नहीं खो रहे हैं !
  • एक से अधिक विकल्प बनाये:- कई बार हम किसी समस्या को सुलझाने में एक ही विकल्प पर आश्रित हो जाते हैं जो की गलत है जरुरी नहीं आपका वह विकल्प सही  निर्णय देने में सफल साबित हो इसलिए एक से अधिक विकल्प बनाये !
  • अच्छे विकल्प का चयन करे:- जितना व्यापक विकल्प आप खोजते हैं, उतना ही बेहतर आपका अंतिम निर्णय होने की संभावना है।कई अलग-अलग विकल्पों को बनाने  से आपके निर्णय को पहले अधिक जटिल बना दिया जा सकता है, लेकिन विकल्पों के साथ आने का कार्य आपको अधिक  गहराई से समझने  और विभिन्न कोणों से समस्या को देखने के लिए मजबूर करता है ! यह तब होता है जब आप विभिन्न रचनात्मक सोच तकनीकों को  नियोजित करते हैं !यदि आपके पास आपका विचार असंतोषजनक है तो आप बाहरी लोगो से भी राय विचार ले सकते हैं !  “गलत होने” के बजाय “सही होने” के आधार पर समस्या को देखने के लिए। इससे मदद मिल सकती है जब निर्णय में शामिल लोग समस्या के बहुत करीब हो !
  • अपने विकल्पों का अन्वेषण करें:-  जब आप संतुष्ट होते हैं की आपने एक अच्छा विकल्प का चयन किया है तो यह समय आपके जोखिम और प्रभाव के मूल्यांकन करने का समय है लगभग हर निर्णय में कुछ जोखिम शामिल होता है ! खतरों का आकलन करने के लिए एक संरचित दृष्टिकोण को अपनाये और प्रतिकूल घटनाओं की संभावना का मूल्यांकन करे ! उन जोखिम को प्राथमिकता दे जिस जोखिम के प्रभाव को आप पहचानते हैं
  • अपनी योजना का मूल्यांकन करे :- विकल्पों का चयन करने के बाद अपनी योजना का मूल्यांकन करे ! अपने फैसले लागू करने से पहले आप पूरी तरह सुनिश्चित कर ले की आप पूरी तरह से सही हो उसमे कोई भी त्रुटिया न हो आपका अंतिम निर्णय आपके तथ्यों और शोध के जितना सही है जितना आप इसे बनाने में मेहनत  किये हैं  ! सुनिश्चित कर ले की आपकी जानकारी भरोसेमंद है जिस पर आपने निर्णय लिया है
  • अपनी निर्णय का संवाद (communicate) करे और उस पर अमल करे:-  एक बार जब आप अपना निर्णय ले लेते हैं, तो आपको इसे आकर्षक और प्रेरणादायक तरीके से प्रभावित हर किसी के साथ संवाद करने की आवश्यकता होती है। अपने निर्णय के बारे में चर्चा कर के समाधान को लागू करे ! आप अपने निर्णय पर कैसे और क्यों पहुंचे यह भी चर्चा करे ! जोखिम और अनुमानित लाभों के बारे में आप जितनी अधिक जानकारी प्रदान करते हैं, उतना ही अधिक लोग आपके निर्णय का समर्थन करेंगे। यदि लोग परिणामस्वरूप आपकी प्रक्रिया में कोई दोष दिखाते हैं, तो नम्रता रखें ! यदि आप अपनी योजना में विफल रहे तो इससे पहले लोगो की समीक्षा सुनना उचित है और अपने निर्णय को बेहतर करे !
  • नोट :- अगर यह पोस्ट आपके लिए मूल्यवान साबित हो तो इसे शेयर आवश्य करे और आप अपने इस वेबसाइट को सब्सक्राइब भी करे कुछ और जानकारी चाहिए तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करे मुझे आपकी मदद करने में ख़ुशी होगी
Note :- अगर आपको ये पोस्ट अच्छी लगी होतो इसे शेयर करे वेबसाइट को सब्सक्राइब करना न भूले। अपने विचार और सुझाव कमेंट बॉक्स में डाले आप हमें मेल भी कर सकते है हमारा मेल आई डी है support@findsolutionhindi.in !