क्या आपको भी तारीफे सुनना पसंद है? क्या आप भी अपने अंदर की कमियां बिलकुल नहीं सुनना चाहते या आलोचना सुनते ही आपको बेचैनी होने लगती है। कमियां बताने वाला दुश्मन बन जाता है। लेकिन जिंदगी में हमेशा वाह-वाह नहीं मिलती दोस्त। बेहतर है कि खुले मन से दूसरों को सुनें और ध्यान रखें कि एक-दो कड़वी बातें हमारी प्रतिभा कम नहीं कर सकतीं। जरूरी है आलोचनाओं को गले लगाना,

आइये जानते हैं आलोचना होने से जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

1. खुद का विकास होता है



  • खुद को और अपनी कमियों को ईमानदारी से देख पाना आसान नहीं होता। इसलिए दूसरे के द्वारा आपके काम के बारे में कुछ कहे जाने पर उसमें सच देखने की कोशिश हमें मानवीय बनाती है, खुद के करीब ले जाती है।
  • अपनी आलोचना को स्वीकारना अपने काम को सुधारने का मौका देता है। हम विषय की बड़ी तस्वीर देख पाते हैं। 
  • दूसरों के द्वारा बतायी गयी कमियां  नए विचारों के रास्ते खोल देती हैं। जब कोई आपको चुनौती देता है, तो वह आपकी सोच का विस्तार भी करता है।
  • दूसरों को क्षमा करके आगे बढ़ जाने का अभ्यास होता है।


2. संबंधों में सुधार लाता है



  • अच्छे दोस्त अपनी राय देकर हमारी मदद करना चाहते हैं, हमें नीचा दिखाना उनका उद्देश्य नहीं होता। शुभचिंतकों की राय ध्यान से सुनें।
  • आलोचनाओं को ढंग से झेलना आपको संतुलित बनाता है। अकसर हमारा अहंकार हमारी सोच को सीमित कर देता है, जो निजी विकास और रिश्तों के लिए अच्छा नहीं।
  • हर बात पर सिर्फ तारीफ करने वाले दोस्त फायदे की जगह नुकसान अधिक पहुंचाते हैं। आलोचना को स्वीकारना अच्छे दोस्तों तक ले जाता है। आप लोगों से सही व्यवहार करना सीखते हैं।


3. भावनात्मक रूप से हम मजबूत बनते हैं



  • अकसर हम तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए उतावले हो जाते हैं। आलोचना सुनने का अभ्यास करना हमें असुविधाजनक स्थिति में भी खुद पर नियंत्रण रखना सिखाता है। हम जान पाते हैं कि कौन सी भावनाएं हमें दुख देती हैं।
  • जब हम भावुक होते हैं, खुद को हीन या फिर दूसरे को अपना दुश्मन मानते हैं, तो समस्या का समाधान नहीं कर पाते। आलोचना को स्वीकार करना समस्या का समाधान करने का कौशल देता है। कठोर सही, पर कई बार दूसरों की कही बातें उपयोगी होती हैं।


4. समय बचाने की कोशिश करते हैं



  • अपने काम के बारे में नेगेटिव सुनकर दूसरों पर गुस्साने या परेशान होने से समय नष्ट होता है। इसकी जगह आलोचना को जल्दी स्वीकार लेना समय व ऊर्जा बचाता है। आप अपनी चिंता और डर से मुक्त होकर शांत चित्त हो पाते हैं।
  • अपने भावों पर नियंत्रण रखते हुए आलोचना को सुनना, उस पर विचार करना, उन मुख्य बिंदुओं को नोट करना आपको सही प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाता है।

5. हमारा आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है



  • जीवन में जितना आगे बढ़ते हैं, आलोचनाएं भी उतनी ही होती हैं। बड़ा हासिल करने के लिए जरूरी है अपना आत्मविश्वास बनाए रखते हुए आलोचना को स्वीकारना।
  • समय के साथ आप जान जाते हैं, किसे स्वीकारना है और किसे छोड़ना उचित है।
  • हमारे अपने 80% विचार नकारात्मक होते हैं, इसलिए दूसरों को शांति से सुनना खुद को सकारात्मक बनाने में मदद करता है। साथ ही आप यह भी जान पाते हैं कि काम में गलतियां होना स्वाभाविक है।
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