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एक कहावत है ‘प्रत्येक बड़ा काम एक छोटे से कदम से शुरू होता है।’ शुरुआत तो कीजिए, रास्ता अपने आप बनता चला जाएगा। यदि आप किसी काम की शुरुआत ही नहीं करेंगे, हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहेंगे तो काम कैसे चलेगा। दुनिया में जितने भी महान लोग हुए हैं और उन्होंने कोई अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है, उनकी जिन्दगी की शुरुआत बेहद छोटे स्तर पर हुई है। साथ ही सभी का जीवन संघर्षमय रहा है। तब जाकर कोई सफलता उनके हाथ लगी। छोटे-छोटे कामों के माध्यम से कैसे बड़े कामों में सफलता प्राप्त की जा सकती है, इसके बारे में विस्तार से समझते हैं –

अपनी अहमियत पहचाने (Recognize your importance)

हमारी जन्मजात प्रवृत्ति है कि लोगों के बीच हम अहमियत चाहते हैं। घर से लेकर बाहर तक हम सम्मानित भूमिका चाहते हैं, लेकिन इसके लिए वह नहीं करते, जो अनिवार्य है। जेम्स ई एमॉस की एक किताब है- थियोडोर रूजवेल्ट, हीरो टु हिज वैलेट। यह किताब वैसे अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट के बारे में है, पर इसमें लोकप्रियता का राज छिपा है। किताब कहती है, हर मामूली, गैर-मामूली समझे जाने वाले को सम्मान देते जाएं। इससे आपको प्यार करने वाले ढेरों लोग मुफ्त में मिल जाएंगे। एमॉस बताते हैं कि रूजवेल्ट जहां होते, उनके आस-पास ओह एनी, ओह जेम्स जैसे दोस्ताना शब्द गूंजते रहते। वह अपने कुक को भी नाम से जानते थे व माली को भी। उन सबकी जरूरतें भी उन्हें पता होती थीं। लोकप्रियता को लेकर ऑस्ट्रिया के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड एडलर ने एक खूबसूरत किताब लिखी है- ह्वाट लाइफ शुड मीन टु यू।  वह लिखते हैं कि असफल व्यक्ति दूसरों में रुचि नहीं रखने वाले होते हैं। अगर आप में दूसरों के लिए रुचि नहीं है, तो आपके जीवन में ज्यादा कठिनाइयां आएंगी और आप दूसरों का नुकसान भी सबसे अधिक करेंगे। उनकी बातें गौर करने लायक हैं। जैसे ही हम दूसरों में रुचि लेना शुरू करते हैं, वातावरण हमारे अनुकूल होता जाता है। हम लोकप्रिय बनते हैं और हमारी राह आसान होती जाती है। यकीनन, दूसरों के लिए अपनी अहमियत बनानी है, तो सबसे पहले दूसरों की अहमियत समझें।

आशावाद बनिए (Be optimistic)

असफलता कष्ट देती है और यह भी हो सकता है कि बहुत बड़ी लगने वाली सफलता में यह लगे कि हाथ कुछ भी नहीं आया। मनोवैज्ञानिक हैमको लॉरेंस शेम्स का मानना है कि सफलता-विफलता को हम एक-दूसरे का शत्रु समझते हैं, जबकि ये दोनों पक्के दोस्त हैं, क्योंकि एक के बिना दूसरे का अस्तित्व ही नहीं है।

आशावाद, सकारात्मक नजरिया, लगातार कोशिश के दम पर खेल, करियर, नौकरी या किसी भी क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। इसके लिए आपको अपनी सोच की डिक्शनरी में से ‘यह हो नहीं सकता’ को हमेशा के लिए निकालना पड़ेगा। अगर, आप ऐसा करने में सफल होते हैं, तब जीवन में जरूर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। दरअसल, असफलताएं सफलता का आधार होती हैं।

इसमें शक नहीं कि अपनी कोशिश जारी रखकर, सफलता तक पहुंचा जा सकता है।   इस संदर्भ में, महान वैज्ञानिक आइंस्टीन जो सात वर्ष की उम्र तक बोलना ही नहीं सीख पाए थे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल छठी कक्षा में फेल हो गए थे। हेनरी फोर्ड अपने शुरूआती व्यवसायों के दौरान पांच बार कंगाल हुए थे। और तो और महानायक अमिताभ बच्चन को ऑडिशन के समय अयोग्य करार दिया गया था। ये बातें बताती हैं कि सफलता की सड़क पर बगैर लड़खड़ाए चलने वाला कोई नहीं है।

सच तो यह है कि किसी की असफलता छिप जाती है और किसी की नहीं। ये सभी व्यक्ति अपने संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत लक्ष्य पाने में सफल रहे। इन सबकी विफलताओं ने ही आखिर में उन्हें सफलता का रास्ता दिखाया। आचार्य महाप्रज्ञ ने कहा है कि जहां जीवन है, वहां आशा और निराशा, दोनों होती हैं। जीतता वही है, जो आशावादी है। आशा ही मनुष्य में उत्साह व प्राण संचार करती है। मुंशी प्रेमचंद का मानना था कि आशा उत्साह की जननी है। आशा में तेज है, बल है, जीवन है। इसलिए आशा का आंचल थामकर आगे बढ़ने में ही भलाई है।

छोटी लेकिन विनम्र शुरुआत कीजिए (Start small but polite)


धीरूभाई अंबानी का नाम अपने देश में शायद ही कोई न जानता हो, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि सफलता के इस शिखर तक पहुंचने के पीछे उनकी बेहद संघर्षमय कहानी रही है, जो एक छोटे से काम से शुरू हुई और सफलता के इस मुकाम तक पहुंची। रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरुभाई अंबानी के पिता हीराचंद भाई प्राइमरी स्कूल के एक सामान्य से शिक्षक थे। माता जमना बेन गृहिणी थीं। तीन भाइयों व दो बहनों के बीच धीरुभाई का बचपन संघर्षमय रहा। इससे निजात पाने के लिए जब भी समय मिलता, वे गांव में ही छोटे-मोटे बिजनेस करते रहते थे। उनके बचपन की एक कहानी बड़ी प्रसिद्ध है कि जब वे मात्र 15 वर्ष के थे, तभी गांव के एक होलसेलर से एक टिन मूंगफली का तेल उधार लाए और सड़क के किनारे बैठ कर बेच दिया। ऐसे ही छोटे-छोटे काम करके वे अपने घर का खर्च निकाल लेते थे। इसी तरह जब स्कूल की छुट्टी होती थी तो वे गांव के मेले में भजिया—पकौड़ी  की दुकान लगा कर पैसा कमा लेते थे। लेकिन ये सब प्रयास भी उनके परिवार को चलाने और धीरुभाई के सपनों को पूरा करने के लिए काफी नहीं थे। इसलिए वे मात्र 17 वर्ष के थे, जब एडेन (अब के यमन) चले गए और वहां के एक पेट्रोल पम्प पर गार्ड का काम करने लगे। यहां से जो पैसा कमाया, उसे उन्होंने अहमदनगर में अपना टेक्सटाइल उद्योग स्थापित करने के लिए लगाया। यह बिजनेस इतना सफल रहा कि देखते ही देखते उन्होंने स्टॉक एक्सचेंज में अपनी पकड़ बना ली। फिर तो कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।  

ऐसी ही महिला हैं शैली गुप्ता, जो एडलविस कैपिटल में ह्यूमन रिसोर्स की ग्रुप हेड हैं।

वर्तमान में एडलविस ग्रुप में सेवाएं दे रही शैली ने शुरुआती शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय से प्राप्त की और बिड़ला इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पिलानी से ग्रेजुएशन किया। 1991 में स्नातक बनने के बाद वह हौंडा कार के साथ मैनेजर के रूप में जुड़ीं। यहां पर उनका काम कार्यक्षेत्र के विस्तार से जुड़ा हुआ था। अपनी मेहनत और काबिलियत के बलबूते उन्होंने 1996 में संगठन छोड़ने के समय तक पांच सदस्यीय टीम को 800 लोगों का कार्य-स्थल बना दिया। साथ ही वहां ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट के बुनियादी ढांचे को भी खड़ा किया।

इसके बाद वह विश्व की अग्रणी सेटलाइट ब्रॉडबैंड सुविधा मुहैया कराने वाली अमेरिकी कम्पनी ह्यूस सॉफ्टवेयर सिस्टम में 1996 से 2001 तक मैनेजर के पद पर कार्य करती रहीं। बाद में वह आईसीआईसीआई वन सोर्स में जुलाई 2002 से अप्रैल 2006 तक रहीं, जहां उन्होंने मार्केटिंग स्ट्रेटिजी के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये। इसके अलावा ह्यूमन रिसोर्स में भी योगदान दिया। इसके बाद उन्होंने आर्थिक सलाह देने वाली अमेरिकी कम्पनी मेरिल लिंच के साथ बतौर हेड ह्यूमन रिसोर्स काम किया। उसके बाद उन्होंने वहां से स्टैण्डर्ड चार्टर्ड में हेड एचआर के रूप में ज्वाइन किया। वहां काम करने के ढाई साल बाद वह एडलविस ग्रुप के साथ फरवरी 2010 को जुड़ गयीं। इस तरह वह अपनी कार्य क्षमता को निखारती रहीं और सदैव आगे बढ़ती रहीं। तो आइये जानते हैं एडलविस कैपिटल में ह्यूमन रिसोर्स की ग्रुप हेड शैली गुप्ता की सफलता के अनमोल विचार–

मेहनत से न घबराएं, परिश्रम ही सफलता की कुंजी है (mehnat se na ghabraaye, parishram hi safalta ki kunji hai)
जीवन में बिना मेहनत के कुछ हासिल नहीं होता। यदि आपको आगे बढ़ना है तो इस रास्ते से गुजरना ही होगा। हां, कुछ लोग होते हैं, जो बिना बहुत कुछ किए बहुत कुछ पा जाते हैं, लेकिन ऐसे लोग होते कितने हैं। किसी भी परीक्षा में किस्मत से पास होने वाले बहुत कम लोग होते हैं, जबकि परिश्रम और मेहनत के बलबूते पास होने वाले असंख्य लोग होते हैं। इसलिए सदैव कोशिश करें कि आप परिश्रम वाले पाले में रहें, ताकि देर से ही सही, पर आपको शर्तिया सफलता मिले।

पैर जमीन पर रहें (Feet stay on the ground)
आपने यह पंक्ति बहुत बार सुनी और पढ़ी होगी। सदियों के अनुभव से परिपूर्ण यह पंक्ति हमें आगाह करती रहती है कि सपने बड़े देखो, लेकिन हवाओं में उड़ कर नहीं, धरातल पर खड़े होकर, क्योंकि सपनों को पूरा होने के लिए भी एक आधार होना चाहिए, एक जमीन होनी चाहिए। आप जब सफलता का स्वाद चख चुके हों, तब भी अपने पैरों को जमीन पर टिकाये रखें, अन्यथा सम्भव है कि हवा में डोलते गुब्बारे की भांति आप नष्ट हो जाएं या तेज हवा आपको उड़ा कर ले जाए।

पलायनवादी न बनें (Don’t be an escapist)
अक्‍सर देखा जाता है कि लोग अपनी पढ़ाई के दिनों या फिर कभी किसी के द्वारा कही बात बताते हुए कहते हैं कि अगर मैं फलां क्षेत्र में होता तो बेहतर रहता। कुछ लोग एक क्षेत्र से कूद कर दूसरे क्षेत्र में और दूसरे से तीसरे में जाते रहते हैं और अंतत: कहीं भी टिक कर काम नहीं करते, इस कारण उनकी ऊर्जा और समय का ह्रास होता है। उनकी मानसिकता पलायनवादी और नॉस्टेल्जिया से ग्रसित हो जाती है, जिसके कारण वह जो नहीं है, उसी को बेहतर मानने लग जाते हैं। जबकि होना यह चाहिए कि आपको जहां मौका मिले, आप वहीं अपने आपको सर्वश्रेष्ठ साबित करें।

जीवन में संतुलन लाएं (Balance life)
पहले जहां पुरुषों को निजी जीवन के साथ-साथ व्यावसायिक जीवन में संतुलन बिठाना पड़ता था, वहीं अब महिलाओं को भी निजी और सामाजिक जीवन में सामंजस्य बना कर चलना पड़ता है। बहुत बार ऑफिस में काम की अधिकता के कारण निजी और व्यावसायिक जीवन के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो जाता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता तो प्रभावित होती ही है, साथ ही वह अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के चलते अपने सहकर्मी और दोस्तों से भी दूरी बनाने लगते हैं। इसका असर उनके करियर और परिवार, दोनों पर दिखता है, इसलिए सदैव कोशिश करें कि जीवन में संतुलन बना रहे। संतुलित मन ही कुछ नया खोज सकता है, कुछ नया सीख सकता है और कुछ नया कर सकता है।

सफलता चाहे दृढ़ विश्वास (Need strong faith for success)
सफलता का मूल मंत्र व्यक्ति की इच्छाशक्ति में छिपा होता है। पॉलो कोएलो की प्रसिद्ध पुस्तक ‘अल्केमिस्ट’ में एक बात लिखी है कि जब आप किसी चीज को पूरी शिद्दत से चाहते हैं तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलाने की तैयारी में जुट जाती है। तो आपको भी अपने कार्य को पूरी शिद्दत और विश्वास के साथ करना होगा, क्योंकि जीत और हार, दोनों ही आपके मन में छुपी होती हैं। उन्हें पहचानने का प्रयास करें। यह सच है कि जब आप अपना विश्वास खो देते हैं तो आप हार जाते हैं और जब आप दृढ़विश्वासी होकर एक बार फिर अपना कार्य करते जाते हैं तो पहली बार में बेशक न सही, लेकिन किसी न किसी प्रयास में आपको सफलता अवश्य मिलती है।

अपने काम का एक रोडमैप तैयार कीजिए (Create a roadmap for your work)


सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज होती है कि किसी काम को करने से पहले उसकी एक योजना या तो अपने दिमाग में तैयार कर लें अथवा किसी कागज पर लिख लें। इससे काम में एक तारतम्यता बनी रहती है और आप अपने रास्ते से भटकते नहीं हैं, नहीं तो आपके मन में रोज एक नया आइडिया आयेगा और रोज उस नए विचार को अपने काम में शामिल करने के बारे में आप सोचते रहेंगे। इससे आप कहीं के नहीं रह जाते और अपने काम से भटक कर कोई और काम करने लग जाते हैं। इससे न तो पहले में सफल हो पाते हैं और न दूसरे में।

काम में अडिग रहें और आगे बढ़ें (Stick to work and move on)


जैसा कि मैंने पहले कहा, जब आप एक काम मन लगा कर करते हैं तो दूसरा काम अपने आप सिद्ध होता चला जाता है। वॉट्स ऐप मोबाइल एप्लिकेशन की कहानी इसकी सबसे बड़ी उदाहरण है। अभी कुछ दिनों पूर्व जब दुनिया के समाचार-पत्रों में यह खबर आई कि सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, वॉट्स ऐप को 19 बिलियन डॉलर में खरीदने वाली है तो एकाएक जान कुयोम का नाम चर्चा में आ गया। लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि कुयोम की जिन्दगी कितनी संघर्षमय रही, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। युक्रेन से सटे कीव के एक छोटे से गांव में पैदा हुए कुयोम की माता गृहिणी थीं और पिता मजदूरी करते थे। लेकिन इससे उनके परिवार का पेट नहीं भर पाता था, इसलिए कुयोम की माता 16 साल के कुयोम को लेकर काम की तलाश में कैलिफोर्निया, अमेरिका आ गईं। और यहीं किराने की एक दुकान में काम करने लगीं। इसी दुकान में मां-बेटे को सोने की जगह भी मिल गई। अपने मां से मिले पैसों को बचा कर कुयोम कंप्यूटर का प्रशिक्षण लेने लगे। 18 साल तक पहुंचते-पहुंचते कुयोम कंप्यूटर के बहुत बड़े हैकर बन गए। परिणाम यह हुआ कि उन्हें 1997 में याहू में काम करने को मिल गया। जल्द ही उन्होंने याहू की नौकरी छोड़कर अर्न्स्ट एंड यंग कम्पनी ज्वाइन कर ली और इससे मिले पैसे से अपने जीवन का पहला आई-फोन खरीदा, जिसका उपयोग करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि मोबाइल के लिए एक अच्छी-सी एप्लिकेशन ईजाद की जा सकती है, जो लोगों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। इस तरह उन्होंने 24 फरवरी, 2009 को अपने जन्मदिन के दिन वॉट्स ऐप एप्लिकेशन लॉन्च की, जिसकी उपयोगिता आज पूरी दुनिया में सिद्ध हो चुकी है।

अच्छा जीवन साथी भी आपको सफल बनाने में काफी मदद करता है (Good life partner also helps you a lot)

सामान रुचि के साथ आगे बढ़ने में सहायक
मैडम मेरी क्यूरी और पियरे क्यूरी शायद दुनिया के ऐसे अकेले पति-पत्नी होंगे, जहां दोनों को ही नोबल पुरस्कार से नवाजा गया। मूलत: पोलैंड में जन्मी मेरी क्यूरी का मन बचपन से ही विज्ञान में, खासकर भौतिकी और रसायनशास्त्र में बहुत लगता था। अपनी इसी रुचि की वजह से उन्हें पेरिस यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिला। उस समय उनके शुरुआती दिन बहुत मुश्किल भरे रहे, क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। फ्रांस जैसे देश की राजधानी में टिके रहना तो और भी मुश्किल भरा काम था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दिन में वह पढ़ाई करतीं और शाम को ट्य़ूशन पढ़ातीं।

इसी बीच उनके एक प्रोफेसर गैब्रियल लिपमैन ने उनकी पहचान पियरे क्यूरी से कराई, जो उस समय भौतिकी और रसायनशास्त्र विभाग के इंस्ट्रक्टर थे। प्रोफेसर लिपमैन ने मेरी क्यूरी का परिचय कराते हुए कहा कि यह बहुत मेहनती लड़की है, लेकिन इसके पास प्रयोग करने के लिए कोई लैब नहीं है। यदि तुम कुछ मदद कर दो तो बहुत मेहरबानी होगी। और अंतत: पियरे ने मेरी को अपना लैब पार्टनर बना लिया। यहीं से उन दोनों के भीतर एक दूसरे के प्रति प्यार की भावना जागी। एक दिन पियरे क्यूरी ने उन्हें प्रपोज किया और कहा, ‘यदि तुम्हारा साथ मिला तो हम बहुत कुछ कर सकते हैं।’ ये वाक्य मेरी क्यूरी के जेहन में उतर गए। फिर क्या था, दोनों एक-दूसरे के साथ जीवनभर के लिए बंध गए। और पूरी दुनिया को पता है कि मेरी क्यूरी दुनिया की अकेली ऐसी महिला वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भौतिकी और रसायनशास्त्र दोनों के लिए दो बार नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है।


मैडम मेरी क्यूरी और सर पियरे क्यूरी की कहानी से एक बात तो साफ है कि यदि पियरे क्यूरी के जीवन में मेरी क्यूरी का साथ न मिला होता और मेरी क्यूरी को पियरे क्यूरी का साथ न मिला होता तो दोनों उस ऊंचाई को कभी नहीं छू सकते थे, जिस ऊंचाई को इन दोनों ने मिल कर छुआ। इसलिए कहते हैं साथ-साथ चलने से ही सफलता की राह आसान बनती है, न कि अलग-अलग चलने से।

संबंधों के महत्व को पहचानें और आगे बढें
देश की एक बड़ी फार्मस्यूटिकल कंपनी ल्युपिन लिमिटेड के संस्थापक देशबंधु गुप्ता से जब उनकी सफलता के बारे में पूछा गया कि आप इसके लिए किसे श्रेय देंगे तो उनका बहुत सहज सा जवाब था- अपनी पत्नी को। उन्होंने बताया कि एक दिन जब मैंने अपनी इच्छा अपनी पत्नी मंजू के सामने रखी तो उसने सहर्ष अपने गहने बेचने की इच्छा जाहिर की और मैंने पत्नी के बेचे हुए गहनों से ल्युपिन की नींव रखी, जिसका परिणाम आप सबके सामने है। प्रोफेसर गुप्ता ने संबंधों की महत्ता बताते हुए कहा कि जीवन में कोई भी संबंध दो पैरों की तरह होता है। एक आगे बढ़ता है तो दूसरा पीछे आता है और जब दूसरा आगे बढ़ता है तो पहला पीछे आता है। लेकिन इन दोनों में कभी कोई मतभेद नहीं होता और न ही कभी इन दोनों के अहं आपस में टकराते हैं, इसलिए जीवन में संबंधों के महत्व को समझें। एक-दूसरे का साथ निभाए बिना हम कभी आगे बढ़ ही नहीं सकते।

सफलता के मूल मंत्र (Safalta ke mool mantra)

आज आपको बता रहा है कैसे असफलता को दी जा सकती है मात..। हो सकता है कि आप अपने जीवन में कुछ पाने के लिए कोशिश कर रहे हैं लेकिन उसे हासिल नहीं कर पाए हों। शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि आप अपने लक्ष्य को पाने के लिए सही तरीके से कोशिश नहीं कर रहें हों। कभी-कभी लोग अपने लक्ष्य को पाने के लिए कुछ छोटी-मोटी कोशिशें करते हैं और असफल होने पर वह अपने लक्ष्य को छोड़ देते हैं। पर असलियत में बात यह होती है कि हमने उस हद तक कोशिश नहीं किया होता है जो हमारे लक्ष्य को पाने के लिए सही है।

  • 1. लक्ष्य की कमी (Lack of goal)– सबसे बड़ा कारण है लक्ष्य। जब तक आपके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं होगा आप कभी सफल नहीं हो सकते। उसी प्रकार अगर आपको यह पता ही नहीं है कि आपके जीवन का लक्ष्य क्या है आप उसे पाएंगे कैसे या वहां पहुंचेंगे कैसे। सफलता की सीढ़ी में पहला कदम होना चाहिए अपना एक लक्ष्य निर्धारित करना। लक्ष्य कुछ इस तरीके का हो जो संभव हो। ऐसा नहीं कि आप एक दिन में करोड़ पति बन जाएंगे।
  • 2. लोगों का डर (Fear of people)– इस तरीके की मुश्किल तभी किसी के जीवन में आती है जब कोई व्यक्ति लोगों के सामने कुछ कहने से डरता हो। इस प्रकार के लोगों को यह डर लगा रहता है कि कोई दूसरा इंसान उनकी बातों का बुरा न मान ले। अगर आपको सफलता प्राप्त करनी है तो आपको लोगों के सामने खड़े हो कर उनका तथा उनके प्रश्नों का उत्तर देना होगा। लोगों के सामने अपने सुझावों तथा विचारों को रखने से उनके और आप के बीच एक नेटवर्क बनता है। एक अच्छा नेटवर्क सफलता पाने के लिए बहुत आवश्यक है क्योंकि आप अपनी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकते हैं।ये हैं वो 10 नियम जिन्हें जाने बिना कभी सफल नहीं हो पाएंगे
  • 3. विनम्रता की कमी (Lack of humility)– जीवन में विनम्रता के बिना कोई भी व्यक्ति सफल नहीं बन सकता। जीवन में सफलता के लिए हमें हमेशा कुछ न कुछ सीखने की चाह रखनी चाहिए। अगर आप अपनी इस बात पर डटें रहेंगे की आप से ज्यादा होशियार और चालक दुनिया में कोई नहीं हैं तो आप गलत हैं।
  • 4. लोगों के साथ जुड़ना ज़रूरी (Important to connect with people)– अगर आप जीवन में लोगों से दोस्ती नहीं कर सकते उनसे आप जुड़ नहीं सकते तो आप जीवन में कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते। जीवन में कोई भी व्यक्ति अकेला ही सफल नहीं बनता वह बहुत सारे व्यक्तियों को साथ ले कर ही सफल बनता है।
  • 5.बहस न करें, बातचीत पर ध्यान दें (Do not argue, focus on conversation)– इससे पहले हमने आपको बताया कि लोगों के साथ जुड़ने तथा लगातार बातचीत से कैसे आप अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि बातचीत करने के साथ-साथ यह भी जरूरी हैं कि आप बातचीत कर रहे हैं या बहस। बातचीत और बहस में एक बहु ही बड़ा फर्क है बहस में कभी भी किसी मुद्दे का हल नहीं निकलता जबकि सोच समझ कर बातचीत करने से सभी मुश्किलों का हल निकलता है।ये हैं वो 10 नियम जिन्हें जाने बिना कभी सफल नहीं हो पाएंगे
  • 6. लक्ष्य को न भूलें (Don’t forget the goal)– कभी कभी हम अपने लक्ष्य के बारे में सोचते तो रहते हैं पर अपने लक्ष्य को पाने के रास्ते में होते नहीं हैं। अपने लक्ष्य के पथ से अलग हो जाने से आप कभी भी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते।
  • 7. मजबूत विश्वास की जरुरत (Strong faith needed)– आपको अपने लक्ष्य पर और अपने आप पर अटूट विश्वास की जरूरत है। अगर आप यह विश्वास ही नहीं करेंगे कि आप अपने लक्ष्य तक पहुंच पाएंगे तो आप कैसे रास्ता ढूंढेंगे और लक्ष्य तक पहुंचेंगे। साथ ही अपने जीवन में सकारात्मक सोच लायें। अपनी सोच को ऊंचा करें क्योंकि आप जितना बड़ा सोचेंगे उतना बड़ा पाएंगे। अपने आप को झूठे बहाना देना बंद करें। अगर आप हर काम के लिए बहाना देंगे तो आपकी सफलता भी आपसे बहाना देती रहेगी और आप अपने सफलता तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे।
  • 9. शिक्षा की कमी (lack of education)– अर्ध ज्ञान या अपर्याप्त शिक्षा से कोई भी व्यक्ति अपने सफलता को प्राप्त नहीं कर सकता। आपका अनुभव और ज्ञान ही सफलता का पहला कदम है। इसके बिना तो आप अपने सफलता के लिए यात्रा शुरू ही नहीं कर सकता। पहले अपनी शिक्षा को पूरी करें, अपने विषय पर पूरी तरह से अपना अनुभव होने के बाद ही अपना लक्ष्य तय करें और आगे बढ़ें।
  • 10. अहंकार और घमंड (Arrogance and pride) – अपने अन्दर इन दो चीजों अहंकार और घमंड को न लायें। इन दो चीजों से पूरी तरीके से दूर रहें क्योंकि इनके रहने तक आप कभी भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

सफलता के लिए  सबसे जरूरी चीज है कि किसी काम को करने से पहले उसकी एक योजना या तो अपने दिमाग में तैयार कर ली जाए या किसी कागज पर लिख ली जाए। इससे काम करने में एक तारतम्यता बनी रहती है और आप अपने रास्ते से भटकते नहीं हैं।

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